36 वर्षीय विवेक तिरपुड़े 11 फ़रवरी 2026 को सरदार पटेल मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, बालाघाट में हाथ की एक सामान्य सर्जरी के लिए भर्ती हुए थे। तब से वे कोमा में हैं। राज्य सरकार की अपनी जाँच ने प्रमाणित किया है कि अस्पताल के आईसीयू में क्या-क्या नहीं था।
मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने 21 अप्रैल 2026 को प्रमाणित किया कि इस आईसीयू में कोई योग्य इंटेंसिविस्ट नहीं था।मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह प्रमाणित किए हुए दिन कि इस आईसीयू में कोई योग्य इंटेंसिविस्ट नहीं था। इन निष्कर्षों पर कार्रवाई का अनुरोध, जो 3 जून 2026 से जिला पंजीयन प्राधिकारी के समक्ष लंबित है, अब तक अनिर्णीत है।
विवेक तिरपुड़े एक मामूली हाथ के फ्रैक्चर (Elective Surgery) के लिए सरदार पटेल मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल गए थे। परिवार का आरोप है कि एनेस्थीसिया (Anesthesia) के दौरान जटिलताएँ हुईं और तुरंत आपातकालीन टीम (Emergency Team) उपलब्ध नहीं थी। विवेक को गंभीर हाइपोक्सिक ब्रेन इंजरी (Hypoxic brain injury) हुई। ये आरोप एफआईआर क्रमांक 0260/2026 का विषय हैं और अनुसंधानाधीन हैं।
तब से विवेक स्वयं साँस नहीं ले पाए हैं। वे ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब के माध्यम से साँस लेते हैं और पेग (PEG) ट्यूब के माध्यम से उन्हें आहार दिया जाता है।
विवेक की देखभाल परिवार के घर पर बनाए गए आईसीयू में हो रही है — ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब से साँस, पेग ट्यूब से आहार, पूर्णकालिक नर्सिंग स्टाफ और प्रतिदिन फिजियोथेरेपी। चेतना के अब भी कोई संकेत नहीं हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), बालाघाट की 21 अप्रैल 2026 की अंतिम जाँच रिपोर्ट में सरदार पटेल अस्पताल की विशिष्ट संचालन संबंधी कमियाँ दर्ज की गई हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बालाघाट ने अपनी 21 अप्रैल 2026 की जाँच रिपोर्ट में प्रमाणित किया कि अस्पताल बिना किसी योग्य इंटेंसिविस्ट और बिना कार्यशील "कोड ब्लू" आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली के अपना आईसीयू संचालित कर रहा था — जो मध्य प्रदेश उपचार्यगृह तथा रुजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम, 1973 एवं नियम, 1997 के अंतर्गत उसके पंजीयन की शर्तों का उल्लंघन है। (मध्य प्रदेश ने केंद्रीय क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 को अंगीकृत नहीं किया है; लागू कानून 1973 का राज्य अधिनियम है।)
CMHO रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि अस्पताल बिना किसी योग्य इंटेंसिविस्ट (ICU Specialist) स्टाफ के ICU चला रहा था — जो कि मरीजों की सुरक्षा का सबसे अहम नियम है।
अस्पताल में जीवन-रक्षक आपात स्थिति के लिए अनिवार्य 'कोड ब्लू' रिस्पांस प्लान ही नहीं था। इसका मतलब आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए उनके पास कोई स्पष्ट प्रोटोकॉल नहीं था।
सरकारी जांचकर्ताओं ने इन कमियों की पुष्टि की है। इनका आपातकालीन प्रतिक्रिया में हुई देरी से क्या और किस प्रकार संबंध रहा, यह आपराधिक अनुसंधान का विषय है, जो जारी है।
ऊपर दिए गए निष्कर्ष सीएमएचओ की 21 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट का सारांश (पैराफ़्रेज़) हैं, रिपोर्ट के शब्दशः अंश नहीं। पूरी रिपोर्ट पढ़ें →
पत्रकारों, मानव अधिकार आयोग के प्रकरण अधिकारियों तथा विधि व्यवसायियों के लिए: ऊपर दर्ज निष्कर्षों के मूल स्रोत दस्तावेज़।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बालाघाट की अंतिम जाँच रिपोर्ट, जिसमें दर्ज है कि गहन चिकित्सा इकाई बिना किसी योग्य इंटेंसिविस्ट और बिना कार्यशील "कोड ब्लू" आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली के संचालित हो रही थी।
→आपराधिक अनुसंधान जारी रहने तक एफआईआर, 23 मार्च 2026 की पूर्व सीएमएचओ जाँच रिपोर्ट तथा शिकायतों एवं अभ्यावेदनों की तिथिवार सूची यहाँ प्रकाशित नहीं की गई हैं। पत्रकार, आयोग एवं विधि व्यवसायी सद्भावपूर्ण अनुरोध justiceforvivek@gmail.com पर भेज सकते हैं।
एफआईआर क्रमांक 0260/2026 दिनांक 29 अप्रैल 2026 को पंजीबद्ध की गई। फॉरेंसिक परीक्षण जारी है। हम अनुसंधान में सहयोग कर रहे हैं और यह माँग कर रहे हैं कि जाँच केवल निचले स्तर के वेतनभोगी कर्मचारियों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रमुख निर्णयकर्ताओं तक पहुँचे।
संबंधित प्रकरण माननीय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में विचाराधीन हैं। इस वेबसाइट की कोई भी सामग्री किसी विचाराधीन प्रकरण के गुण-दोष पर टिप्पणी करने के उद्देश्य से नहीं है।
हमारी तीन माँगें
सीएमएचओ के निष्कर्षों पर कार्रवाई का अनुरोध, जो 3 जून 2026 से जिला पंजीयन प्राधिकारी के समक्ष लंबित है, अब तक अनिर्णीत है।
ताकि इस प्रकरण को दिशा देने वाली विशेषज्ञ राय पर कोई प्रश्न न उठे।
एफआईआर 0260/2026 में उपयुक्त कड़ी धाराएँ जोड़ी जाएँ और जाँच बालाघाट जिले के बाहर के अधिकारी से कराई जाए।
विवेक की स्थिति और प्रकरण पर परिवार के अपने शब्दों में छोटे, तिथिवार अपडेट। (अपडेट अंग्रेज़ी में हैं।)
सभी अपडेट →संक्षिप्त उत्तर, तिथिवार अभिलेखों पर आधारित। यहाँ की हर बात दस्तावेज़ों से जुड़ी है।
11 फ़रवरी 2026 को 36 वर्षीय विवेक का सरदार पटेल मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, बालाघाट (मध्य प्रदेश) में हाथ के फ्रैक्चर का एक पूर्व-नियोजित ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन के दौरान उन्हें हाइपोक्सिक ब्रेन इंजरी हुई और तब से वे कोमा में हैं। अब उनकी देखभाल परिवार के घर पर बनाए गए आईसीयू में हो रही है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), बालाघाट ने 21 अप्रैल 2026 की अपनी अंतिम जाँच रिपोर्ट में दर्ज किया कि अस्पताल अपना आईसीयू बिना किसी योग्य इंटेंसिविस्ट और बिना कार्यशील कोड ब्लू आपातकालीन प्रणाली के चला रहा था, जो उसके पंजीयन की शर्तों का उल्लंघन है। यह हमारा सारांश है; पूरी रिपोर्ट का स्कैन और लागू कानून सीएमएचओ रिपोर्ट पृष्ठ पर है। इन कमियों का आपातकालीन प्रतिक्रिया में हुई देरी से क्या और किस प्रकार संबंध रहा, यह जारी आपराधिक अनुसंधान का विषय है।
हाँ। एफआईआर क्रमांक 0260/2026 दिनांक 29 अप्रैल 2026 को थाना बालाघाट में पंजीबद्ध हुई। फॉरेंसिक परीक्षण जारी है। संबंधित प्रकरण माननीय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में विचाराधीन हैं, और इस वेबसाइट की कोई भी सामग्री किसी विचाराधीन प्रकरण के गुण-दोष पर टिप्पणी करने के उद्देश्य से नहीं है।
तीन माँगें: जिला पंजीयन प्राधिकारी सीएमएचओ के निष्कर्षों पर कार्रवाई के उस अनुरोध पर निर्णय लें जो 3 जून 2026 से लंबित है; मध्य प्रदेश के बाहर का स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड; और एफआईआर 0260/2026 में उपयुक्त कड़ी धाराएँ जोड़कर जाँच बालाघाट जिले के बाहर के अधिकारी से कराई जाए। आप पिटीशन साइन करके, मिलाप पर विवेक के इलाज में सहयोग करके, या शुभकामना-पट पर संदेश छोड़कर मदद कर सकते हैं।
हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत हैं कि सरकार के अपने निष्कर्षों पर कार्रवाई हो और जाँच उन लोगों तक पहुँचे जिन्होंने निर्णय लिए। हम इसे अकेले नहीं कर सकते।
Change.org पिटीशन पर अपना नाम जोड़कर अधिकारियों से जवाबदेही की मांग करें।
→विवेक के लंबे ICU प्रवास और पुनर्वास में मदद करने के लिए मिलाप (Milaap) के माध्यम से दान करें।
→उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करें या उनके साथ कोई याद साझा कर अपना समर्थन दिखाएं।
→यदि आपके परिवार को मध्य प्रदेश के किसी निजी अस्पताल में ऐसा ही अनुभव हुआ है, तो आप हमें ईमेल से संपर्क कर सकते हैं।
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